Monday, August 11, 2008

एक नया दिन , एक नई शुरुआत..

सपने..ख्वाब..या कुछ और...

सपने देखने का हक सबके पास है लेकिन उन सपनों को पुरा कर पाना सबके बस में नही है..मुझे बचपन से सिखाया गया है की सपने मत देखो ,,सपने कभी पूरे नही होते । मुझे बताया गया कि सपने देखना आलसियों का काम है । मुझे अच्छे से समझाया गया है कि सपनों कि असल ज़िन्दगी में कोई जगह नही होती है। लेकिन मैंने बचपन में एक सपना देखा। बचपन से उस सपने को मैंने बड़े अरमानों से सम्भाल के रखा हुआ है। और उस सपने को पुरा करने के लिए मैंने मेहनत की है..अपने दिन रात एक किये हैं । जल्द बहुत जल्द में अपने सपने को पुरा कर लूँगा।

ये सिर्फ़ मेरा एक सपना नहीं है..ये एक जिद है। ये एक जिद है सबको साबित करने की कि सपने पूरे होते हैं, सपने क्या हर वो चीज़, हर वो बात,हर ख्वाहिश पूरी होती है अगर उसको पूरा करने कि कोशिश पूरे दिल से हो।

मेरा सपना पूरा होने वाला है, होते ही आप सब को बताउगा की मैंने कौन सा सपना देखा है...

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