Friday, March 20, 2009

समझें " सलवा जुडूम "

भारत एक महान देश है और यहाँ के लोग और भी ज्यादा महान हैं । ख़ुद को क्रिकेट खेलना नहीं आता होगा लेकिन क्रिकेट खिलाड़ियों पर कमेन्ट जरुर करेंगे , ख़ुद राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगे लेकिन राजनीति को भला बुरा जरुर कहेंगे । ठीक इसी तरह अधिकतर समझदार भारतीय इस वक्त सलवा जुडूम के बारे में बात कर रहे हैं . उसे ग़लत ठहरा रहे हैं । उन समझदार लोगों को सिर्फ़ इतना ही पता है कि सलवा जुडूम में छत्तीसगढ़ की सरकार ने भोले भाले आदिवासिओं को निहत्थे मरने के लिए नक्सलियों के सामने छोड़ दिया है। जो थोड़े और समझदार हैं वो इतना और जानते हैं कि कुछ ' समझदार ' मानवाधिकार कार्यकर्त्ता सलवा जुडूम शिविर में गए थे और वहां उन शिविरों की दुर्दशा देखकर उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की काफी आलोचना की है। उन सर्वज्ञानी लोगों की रिपोर्ट को सही मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन शिविरों को बंद करने को कहा है।
घर में सो कर के सलवा जुडूम के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को कटघरे में खडे करने वाले उन सब समझदार लोगों से मेरा निवेदन है कि वास्तविकता को समझे बिना ज्यादा चिल्ल पौं न करें..पहले जमीनी हकीकत समझें फिर कुछ कहें , नही तो छत्तीसगढ़ में भी किसी राज ठाकरे को पैदा होने में ज्यादा टाइम नही लगेगा।

Thursday, March 19, 2009

गन्दी राज-नीति..

कुछ वक्त पहले महाराष्ट्र में जो खेल बल ठाकरे , गुजरात में नरेन्द्र मोदी खेला करते थे कुछ उसी तरह का खेल वरुण गाँधी ने खेलने का प्रयास किया है। गाँधी परिवार के इस गुमनाम "फूल" का यह अच्छा प्रयास कहा जा सकता था अगर वो हिंदूवादी तान छेड़ने से पहले प्रवीण तोगडिया से क्लास ले के आते। इसलिए उनसे निवेदन है की जाए पहले किसी कट्टर हिंदूवादी से क्लास ले के आए या अपने परिवार के आदर्शों पर चलते हुए किसी दलित के घर में रात बिताएं।

Monday, March 16, 2009

पहला ब्लॉग..

कुछ समय पहले तक सोचा भी नहीं था कि मैं भी कभी ब्लॉग लिखूंगा लेकिन कभी तो , कभी तो ऐसा होना ही था।
मन में बहुत कुछ है जिसे मैं लिखना चाहता हूँ , सबको बताना चाहता हूँ और इसके लिए ब्लॉग मेरा सहारा बनेगा।
ये ब्लॉग मेरा वो ब्रहमास्त्र बनेगा जिससे मैं राज-नीति , अर्थ -व्यवस्था और भी कई सामाजिक व्यवस्थाओं पर प्रहार करने कि कोशिश करूँगा। साथ ही मैं कोशिश करूँगा कि आप सबको " कभी तो " के माध्यम से असली छत्तीसगढ़ से परीचित कराऊँ ।।

Wednesday, February 25, 2009

कोई तो समाधान होगा इस नासूर का.?

कश्मीर भारत में उठ रहे आज़ादी की मांग, या पाकिस्तान परस्त रास्तर्द्रोही इस्लामिक जेहाद ? कश्मीर जिसे धरती का स्वर्ग और भारत का मुकुट कहा जाता था आज भारत के लिए एक नासूर बन चूका है। कारण सिर्फ मुस्लिम जेहाद के तहत कश्मीर को इस्लामिक राज्य बना कर पाकिस्तान के साथ मिलाने की योजना ही है, और आज रास्त्रद्रोही अलगाववादियों ने अपनी आवाज इतनी बुलंद कर ली है की कश्मीर अब भारत के लिए कुछ दिनों का मेहमान ही साबित होने वाला है और यह सब सिर्फ कश्मीर में धारा ३७० लागु कर केंद्र की भूमिका को कमजोर करने और इसके साथ साथ केंद्र सरकार का मुस्लिम प्रेम वोट बैंक की राजनीति और सरकार की नपुंसकता को साबित करने के लिए काफी है यह बात कश्मीर के इतिहास से साबित हो जाता है जब सरदार बल्लव भाई के नेतृतव में भारतीय सेना ने कश्मीर को अपने कब्जे में ले लिया था परन्तु नेहरु ने जनमत संग्रह का फालतू प्रस्ताव लाकर विजयी भारतीय सेना के कदम को रोक दिया जिसका नतीजा पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी छद्म सेना से कश्मीर में आक्रमण करवाया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया । और कश्मीर भारत के लिए एक सदा रहने वाली समस्या बन कर रह गयी और पाकिस्तान कश्मीर को हथियाने के लिए नित्य नयी चालें चलने लगा नतीजा भारत की आज़ादी के समय कश्मीर की वादी में लगभग 15 % हिन्दू थे और बाकी मुसल्मान । आतंकवाद शुरु होने के बाद आज कश्मीर में सिर्फ़ 4 % हिन्दू बाकी रह गये हैं, यानि कि वादी में 96 % मुस्लिम बहुमत है । वादी में कश्मीरी पंडितों की पाकिस्तान समर्थित इन्ही रस्त्रद्रोही अलगाव वादियों द्वारा खुले आम हत्याएं की जा रही थी और सरकार मौन रही थी इन हत्याओं और सरकार की नपुंसकता का एक उदाहरण यहाँ दे रहा हूँ सन् १९८९ से १९९० यानि एक वर्ष में ३१९ कश्मीरी पंडितों की हत्या की गयी और इसके बाद के वर्षो में यह एक सिलसिला ही बन गया था और सरकार का रूप तब स्पष्ट हो जाता है जब जम्मू-कश्मीर के वंधामा में दस साल पहले हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के बारे में गृह मंत्रालय को जानकारी नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि विभाग को ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है, जिसमें बच्चों समेत 24 कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया गया था। यह घटना जग विदित है मगर सरकार को इसके बारे में मालूम नहीं, सरकार के इसी निक्कम्मा पण के वजह से आज इन रास्त्रद्रोही अलगाववादियों का हिम्मत इतना बढ़ गया है की अब ये कश्मीर को पूर्ण इस्लामिक राज्य मानकर कश्मीर को पाकिस्तान के साथ मिलाने के लिए अब कश्मीर में बहरी राज्यों से आये हिन्दू मजदूरों को बहार निकल रहे हैं स्वतंत्रता दिवस के पवन अवसर पर हिंदुस्तान के रास्त्रघ्व्ज को जलाया गया हिंदुस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाया जा रहा है और सरकार मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए चुप बैठी है कश्मीर में आर्मी के कैंप पर हमला करके उनको जलाया जा रहा है फिर हम कैसे कह सकते हैं की कश्मीर हमारे अन्दर में है अगर कश्मीर का मुस्लिम हमारे साथ है तो क्यों वह देशद्रोही अलगाववादियों का साथ दे रही है? अगर केंद्र सरकार कश्मीर समस्या का समाधान चाहती है तो क्यों नहीं वह वहां के अलगाववादी आतंकवादियों को के खिलाफ एक्शन ले रही है ? क्यों नहीं सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों को फिर से उनके जमीन को वापस दिला रही है क्यों कश्मीरी पंडितो के हक़ का दमन कर रही है ? क्यों नहीं आज तक हुए कश्मीर में कश्मीरी पंडितो के हत्याकांडो की जाँच करवा रही है ? कश्मीरी भाइयो का साथ देने वाले साम्प्रदायिक और अलगाववादी देशद्रोही सरकार के नज़र में क्यों आज़ादी का नेता बना हुआ है ? अगर इस सवाल का जवाब सरकार के पास नहीं है तो सरकार देश की जनता को धोखा देना छोर दे की कश्मीर हमारा है और अगर सरकार सच में कश्मीर समस्या का समाधान चाहती है तो कश्मीरी पंडितो को इंसाफ दिलाये और अलगाववादी आतंकवादियों को सजा देकर कश्मीर को इन देशद्रोहियों से मुक्त कराये, अंत में एक सवाल सरकार और आपलोगों से क्या हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले अपने रास्त्रध्व्ज तिरंगे को सीने से लगाये मरने वाले साम्प्रदायिक हैं ?क्या हिंदुस्तान मुर्दाबाद का नारा लगा कर अपने रास्त्र ध्वज तिरंगे को जलाने वाला देशद्रोही नहीं और अगर देश द्रोही है तो इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं ?इस आंख की अंधी सरकार से इंसाफ की क्या उम्मीद इसलिए अपने दर्द का मरहम ढूंढने आपके पास आया हूँ मैं..

Monday, August 11, 2008

एक नया दिन , एक नई शुरुआत..

सपने..ख्वाब..या कुछ और...

सपने देखने का हक सबके पास है लेकिन उन सपनों को पुरा कर पाना सबके बस में नही है..मुझे बचपन से सिखाया गया है की सपने मत देखो ,,सपने कभी पूरे नही होते । मुझे बताया गया कि सपने देखना आलसियों का काम है । मुझे अच्छे से समझाया गया है कि सपनों कि असल ज़िन्दगी में कोई जगह नही होती है। लेकिन मैंने बचपन में एक सपना देखा। बचपन से उस सपने को मैंने बड़े अरमानों से सम्भाल के रखा हुआ है। और उस सपने को पुरा करने के लिए मैंने मेहनत की है..अपने दिन रात एक किये हैं । जल्द बहुत जल्द में अपने सपने को पुरा कर लूँगा।

ये सिर्फ़ मेरा एक सपना नहीं है..ये एक जिद है। ये एक जिद है सबको साबित करने की कि सपने पूरे होते हैं, सपने क्या हर वो चीज़, हर वो बात,हर ख्वाहिश पूरी होती है अगर उसको पूरा करने कि कोशिश पूरे दिल से हो।

मेरा सपना पूरा होने वाला है, होते ही आप सब को बताउगा की मैंने कौन सा सपना देखा है...